12 July, 2022

• क़त्ल-ए-ख़्वाहिश

परवाना-ए-महफ़िल को न अफ़सोस, तमाम ख़्वाहिशों के क़त्ल का,
शमअ-ए-ग़ैर के अरमान पूरे किए थे, ख़ुद की आरज़ू को फ़ना कर.

(क़त्ल-ए-ख़्वाहिश-execution of wish, १-execution, २-flare of stranger, ३-wipe out)
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2 comments:

Dr.Makarand V.Khubalkar said...

Bahot Umda!

Jitendra Rachalwar (Rachal) said...

शुक्रिया मकरंदजी।