A collection of promotional pages of my poetry books, poems, stories and articles
22 February, 2025
• उल्फ़त
01 December, 2023
• बयाँ
05 May, 2023
• बेख़बर
04 November, 2022
• बिरहिनी
12 July, 2022
• क़त्ल-ए-ख़्वाहिश
21 December, 2021
• हुस्न-ए-सर्मा
भारत की ज़ियादातर रियासतों१
का साल का लंबा दौर गर्मी में बीतता है, लिहाज़ा यहाँ सर्मा२ का इस्तिक़बाल३
गर्मजोशी से होता है। सब को आसूदा४ करने वाले इस मौसम के आते ही ठंडी हवाओं
में नहाकर सुबह कोहरे में लिपट जाती है। ताज़ी सब्ज़ियों से मंडियाँ सँवर जाती हैं, और
मुख़़्तलिफ़५ फलों की ख़ुशबू से फ़ज़ा महक उठती है। लहलहाती फ़लाहतों६
में इज़्तिमाअ७ कर तरह-तरह के लज़ीज़८ गिज़ाओं९ का लुत्फ़१०
उठाने का भी रिवाज है।
एक ओर सब को तर-ओ-ताज़ा करने वाला यह मौसम कई मग्रिबी-ओ-शुमाली११
मुल्कों में क़हर भी ढाता है। तूफ़ानी बर्फ़बारी और इंतिहाई१२ ठंड के नतीजतन्
इन मुल्कों में लोग बेहद मुश्किल हालात से जूझते हैं। सर्मा हो या गर्मा१३,
हर मौसम का एक पहलू लुभावना, तो दूसरा शदीद होता है।
19 December, 2021
• नाज़-ओ-अफ़सोस
09 March, 2021
• उद्विग्न
30 October, 2020
• The Moon
(‘Sharad Poornima’ is full moon day of ‘Aashwin’ month of Hindu calendar and has a cultural significance in India.)
05 October, 2020
• Autumn
28 July, 2020
• Hope
21 July, 2020
• Confess
05 June, 2020
22 May, 2020
• Wise and Silly
19 May, 2020
14 May, 2020
14 February, 2020
• कारण
समाज में बंधनों के साथ जीना और बढ़ना होता है। किसने, कब और क्यों यह बंधन डाले, यह कोई नहीं जानता। चाहे प्रेम की हो, द्वेष या फिर नाराज़गी की; स्त्रियों को इन भावनाओं को व्यक्त करने के बंधनों में तनिक शिथिलता है; किंतु पुरुषों को किसी स्त्री के प्रति प्रेम तो दूर, आस्था जताने की भी स्वायत्तता बड़ी कंजूसी से मिलती है।
जिस व्याकुलता का प्रेमी और प्रेमिका को अब तक केवल एहसास था, उसे शब्दों में कहना अब अनिवार्य था; किंतु पहल कौन करे? शर्मसार होती प्रेमिका को झिझक ने बेबस कर दिया था। अंततः प्रेमी ने अभिव्यक्ति के सारे बंधनों को तोड़ प्रेमिका से ‘कारण’ कह ही डाला। जो अब तक व्याकुलता के आवरण से ढँके थे, उन समर्पित भावों को सुन प्रेमिका सराबोर हो गई।
प्राची का गुलाल थी या, अस्त की उद्विग्नता तुम,
■ Valentine's Day







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