14 February, 2023

• बेचारगी

मेरी बेचारगी के बिखरे हुए क़त्रों के जाम,
ज़िहन में उतार रहा है बेख़बर ज़माना,
कल जो निकलेंगे अरमान बज़्म के,
जाने क्या सूरत होगी उन अश्क-ओ-ग़म की.

(१-bit, २-mind, ३-assembly, ४-tears and grief)
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2 comments:

Mohan said...

उमदा 👍🏽

Jitendra Rachalwar (Rachal) said...

शुक्रिया मोहन।