12 May, 2022

• अख़लाक़

जिससे उभरे उसी मिट्टी में मिलना, मुक़द्दर होता है हर दिल का,
दिलदारी से जहाँ को आसूदा करना ही, मक़्सद हो हर धड़कन का.

ज़बाँ न हो बेपर्वा, अलफ़ाज़ से मज़्रूह न हो जिगर,
भीड़ में क़ाइम करें तेरा तअर्रुफ़, तेरे शाइस्ता अंदाज़-ओ-फ़न-ओ-हुनर.

आज का वल्वला रवाँ जवाँ, सहारा बने हर ग़ैरइख़्तियारी बुढ़ापे का,
शीरीं ज़िहनियत ही ज़रीआ हो, दिलों में बसी ख़फ़गी पर फ़तह पाने का.

(अख़लाक़-virtuous, १-fate, २-contented, ३-wounded, ४-identity, ५-enthusiasm, ६-unavoidable, ७-sweet, ८-displeasure)
*****

No comments: