हर लौ का पर्तोव७ बने, इस्तिलाह८ ग़ालिब हौसले की,
A collection of promotional pages of my poetry books, poems, stories and articles
29 September, 2019
• नवरात्रि
28 September, 2019
27 September, 2019
26 September, 2019
25 September, 2019
• हक़ीक़त-ए-उल्फ़त
24 September, 2019
• बेमतलब
23 September, 2019
22 September, 2019
21 September, 2019
• अमन
■ International Day of Peace
30 August, 2019
• मुट्ठी भर अनाज
एक लंबे अरसे से
किसानों की आत्महत्याओं ने देश के समक्ष बहुत बड़ा प्रश्न चिह्न निर्माण कर दिया
है। भ्रष्टाचार के अनेक पहलुओं में से ‘जागृति’ में तो केवल एक का वर्णन था।
किसानों की समस्या भी भ्रष्टाचार का ही एक अहम् पहलू है। सहस्रों करोड़ों की
योजनाओं के घोटाले से विपुल इस देश में, कुकर्मियों ने अन्न की उपज तक को नहीं
बख़्शा। विशेषज्ञों की राय में भविष्य का संघर्ष अन्न व जल के लिए ही होगा। हमारे
देश की कृषि और किसानों की दयनीय स्थिति देखकर तो यह राय सत्य प्रतीत होती है। जो
भी इस दुष्कृत्य में शामिल हैं वे शायद यह नहीं जानते, कि अन्न व जल के बिना न तो
सत्ता और न ही ऐश्वर्य का कोई अस्तित्व है।
23 August, 2019
• कहाँ हो तुम कृष्ण
15 August, 2019
• स्वतंत्र
04 August, 2019
‘गीली हथेली’
शालेय जीवन से इन्टर्नशिप पूर्ण होने तक कई मित्र हुए, किंतु इन्टर्नशिप के पश्चात मित्रों से भेंट कम ही होती थी। एक विचित्र सा ख़ालीपन महसूस होने लगा। पत्र भेजता, तो उनमेंसे कुछ ही जवाब लिखते। धीरे-धीरे सारे मित्र व्यस्त हो गए। दोनों ओर के पारिवारिक, सामाजिक, व्यावसायिक और व्यक्तिगत कारणों से संपर्क लगभग ख़त्म हो गया। मित्रों की बहुत याद आती। बीते वर्षों और वर्तमान की तमाम बातें किसीसे कहने का मन होता; किंतु दूरियाँ कुछ ऐसी बन गई थीं, कि कह न पाया। ई-मेल, फ़ेसबुक इत्यादि से तकनीकी रूप से तो सारे क़रीब आ गए थे; परंतु भावनात्मक दूरियाँ वैसीही रह गईं। एक दिन औपचारिकता की सारी बेड़ियाँ तोड़कर सोचा, कि पुराने दिनों की तरह ख़त ही लिख दूँ मित्र को। फिर क्या था; क़लम उठाया, तो सारा सैलाब ही काग़ज़ पर उतर आया।
मित्र और मित्रता की परिभाषा एक ही रहेगी; फिर युग कृष्ण-सुदामा का हो, या थ्री इडियट्स का।
मेरी आँखों से बहे खारे पानी से,
■ Friendship Day
05 July, 2019
• मेरा हिंदी-उर्दू मज्मूआ-ए-कलाम
16 June, 2019
• अब्बा
19 February, 2019
• मातीची लकतरे
26 January, 2019
• राग सरकारी
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15 January, 2019
• मकर-संक्रांति
(Select lines from my Hindi-Urdu poetry book)









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